Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.34.54: वश में न होने के कारण यह जगत् विषयों में लिप्त होने वाली इन्द्रियों से उसी प्रकार पीड़ित होता है जैसे सूर्य आदि से ग्रह-नक्षत्र तिरस्कृत हो जाते हैं ॥54॥ | mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वश में न होने के कारण यह जगत् विषयों में लिप्त होने वाली इन्द्रियों से उसी प्रकार पीड़ित होता है जैसे सूर्य आदि से ग्रह-नक्षत्र तिरस्कृत हो जाते हैं ॥54॥
Due to not being under control, this world suffers from the senses that indulge in objects in the same way as the stars and planets get rejected by the Sun etc. 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥