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mahabharat 5.34.52: नीच मनुष्य जीविका के नाश से डरते हैं, साधारण मनुष्य मृत्यु से डरते हैं; किन्तु श्रेष्ठ मनुष्य अपमान से सबसे अधिक डरते हैं ॥ 52॥   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.34.52 
अवृत्तिर्भयमन्त्यानां मध्यानां मरणाद् भयम्।
उत्तमानां तु मर्त्यानामवमानात् परं भयम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
नीच मनुष्य जीविका के नाश से डरते हैं, साधारण मनुष्य मृत्यु से डरते हैं; किन्तु श्रेष्ठ मनुष्य अपमान से सबसे अधिक डरते हैं ॥ 52॥
 
Mean men fear loss of livelihood, mediocre men fear death; but great men fear humiliation the most. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)