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mahabharat 5.34.48: मनुष्य में शील ही सबसे बड़ा गुण है; यदि वह नष्ट हो जाए तो इस संसार में उसके जीवन, धन और मित्र किसी काम के नहीं रहते ॥48॥   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.34.48 
शीलं प्रधानं पुरुषे तद् यस्येह प्रणश्यति।
न तस्य जीवितेनार्थो न धनेन न बन्धुभि:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य में शील ही सबसे बड़ा गुण है; यदि वह नष्ट हो जाए तो इस संसार में उसके जीवन, धन और मित्र किसी काम के नहीं रहते ॥48॥
 
In a man, modesty is the most important quality; if it is lost, then his life, wealth and friends are of no use to him in this world. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)