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mahabharat 5.34.29: जो राजा धर्म को त्यागकर अधर्म का आचरण करता है, उसके राज्य का क्षेत्र आग में रखी हुई त्वचा के समान सिकुड़ जाता है। 29.   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.34.29 
अथ संत्यजतो धर्ममधर्मं चानुतिष्ठत:।
प्रतिसंवेष्टते भूमिरग्नौ चर्माहितं यथा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो राजा धर्म को त्यागकर अधर्म का आचरण करता है, उसके राज्य का क्षेत्र आग में रखी हुई त्वचा के समान सिकुड़ जाता है। 29.
 
A king who abandons Dharma and practices Adharma, his kingdom's territory shrinks like skin kept on fire. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)