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mahabharat 5.34.27: अन्याय में डूबा हुआ राजा अपने पूर्वजों का राज्य पाकर भी अपने कर्मों से उसे भ्रष्ट कर देता है, जैसे वायु बादलों को तितर-बितर कर देती है॥27॥   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.34.27 
पितृपैतामहं राज्यं प्राप्तवान् स्वेन कर्मणा।
वायुरभ्रमिवासाद्य भ्रंशयत्यनये स्थित:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
अन्याय में डूबा हुआ राजा अपने पूर्वजों का राज्य पाकर भी अपने कर्मों से उसे भ्रष्ट कर देता है, जैसे वायु बादलों को तितर-बितर कर देती है॥27॥
 
A king steeped in injustice, even after inheriting the kingdom of his forefathers, corrupts it by his actions, just as the wind scatters the clouds.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)