Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.34.24: राजा की भाँति, यदि वह पूर्ण रूप से खिल (सुख) गया हो, तो भी उसे फलों से रहित (अधिक दान न करने वाला) होना चाहिए। यदि वह फलों से भरा (दाता) हो, तो भी उसे ऐसे (पहुँच से दूर) होना चाहिए जिस पर चढ़ा न जा सके। यदि वह अपरिपक्व (कम शक्तिशाली) हो, तो भी उसे परिपक्व (शक्तिशाली) के समान स्वयं को प्रकट करना चाहिए। ऐसा करने से उसका नाश नहीं होता।॥24॥ | mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा की भाँति, यदि वह पूर्ण रूप से खिल (सुख) गया हो, तो भी उसे फलों से रहित (अधिक दान न करने वाला) होना चाहिए। यदि वह फलों से भरा (दाता) हो, तो भी उसे ऐसे (पहुँच से दूर) होना चाहिए जिस पर चढ़ा न जा सके। यदि वह अपरिपक्व (कम शक्तिशाली) हो, तो भी उसे परिपक्व (शक्तिशाली) के समान स्वयं को प्रकट करना चाहिए। ऐसा करने से उसका नाश नहीं होता।॥24॥
Like a king, even if he is in full bloom (in happiness), he should be empty of fruits (should not give much). Even if he is full of fruits (giver), he should be like one who cannot be climbed (out of reach). Even if he is immature (less powerful), he should reveal himself like a ripe (powerful) one. By doing so, he is not destroyed.॥24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥