श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.34.22 
कांश्चिदर्थान् नर: प्राज्ञो लघुमूलान् महाफलान्।
क्षिप्रमारभते कर्तुं न विघ्नयति तादृशान्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान् पुरुष उन कार्यों को शीघ्र आरम्भ करता है जिनका मूल तो छोटा होता है, परन्तु परिणाम महान होता है; वह अपने मार्ग में किसी भी बाधा को आने नहीं देता ॥22॥
 
A wise man begins those works early whose origin is small but the result is great; he does not allow any obstacle to come in his way. ॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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