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श्लोक 5.34.22  |
कांश्चिदर्थान् नर: प्राज्ञो लघुमूलान् महाफलान्।
क्षिप्रमारभते कर्तुं न विघ्नयति तादृशान्॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| बुद्धिमान् पुरुष उन कार्यों को शीघ्र आरम्भ करता है जिनका मूल तो छोटा होता है, परन्तु परिणाम महान होता है; वह अपने मार्ग में किसी भी बाधा को आने नहीं देता ॥22॥ |
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| A wise man begins those works early whose origin is small but the result is great; he does not allow any obstacle to come in his way. ॥22॥ |
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