Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.34.2: हे विदुर! अपने मन से विचार करके मुझे उचित सलाह दीजिए। आप जो भी युधिष्ठिर और कौरवों के लिए हितकर समझें, कृपया मुझे बताइए।   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.34.2 
त्वं मां यथावद् विदुर प्रशाधि
प्रज्ञापूर्वं सर्वमजातशत्रो:।
यन्मन्यसे पथ्यमदीनसत्त्व
श्रेयस्करं ब्रूहि तद् वै कुरूणाम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे विदुर! अपने मन से विचार करके मुझे उचित सलाह दीजिए। आप जो भी युधिष्ठिर और कौरवों के लिए हितकर समझें, कृपया मुझे बताइए।
 
Generous Vidur! Think with your mind and give me the right advice. Whatever you think is beneficial for Yudhishthira and for the Kauravas, please tell me that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)