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mahabharat 5.34.18: जैसे माली बगीचे में लगे हर फूल को तोड़ता है, उसकी जड़ नहीं काटता, वैसे ही राजा को भी अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए और उनसे कर वसूलना चाहिए। उसे कोयला खनिक की तरह उन्हें जड़ से नहीं काटना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.34.18 
पुष्पं पुष्पं विचिन्वीत मूलच्छेदं न कारयेत्।
मालाकार इवारामे न यथाङ्गारकारक:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जैसे माली बगीचे में लगे हर फूल को तोड़ता है, उसकी जड़ नहीं काटता, वैसे ही राजा को भी अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए और उनसे कर वसूलना चाहिए। उसे कोयला खनिक की तरह उन्हें जड़ से नहीं काटना चाहिए।
 
Just like a gardener plucks each flower in the garden and does not cut its root, similarly the king should protect his subjects and collect taxes from them. He should not cut them from the root like a coal miner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)