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mahabharat 5.34.17: जिस प्रकार भौंरा फूलों की रक्षा करता है और उनका रस ग्रहण करता है, उसी प्रकार राजा को भी अपनी प्रजा को बिना कष्ट दिए उनसे धन ग्रहण करना चाहिए। 17.   |   mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.34.17 
यथा मधु समादत्ते रक्षन् पुष्पाणि षट्पद:।
तद्वदर्थान् मनुष्येभ्य आदद्यादविहिंसया॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार भौंरा फूलों की रक्षा करता है और उनका रस ग्रहण करता है, उसी प्रकार राजा को भी अपनी प्रजा को बिना कष्ट दिए उनसे धन ग्रहण करना चाहिए। 17.
 
Just as a bumble bee protects the flowers and takes their nectar, similarly a king should take money from his subjects without causing them any trouble. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)