Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.34.12: 'अब मुझे राज्य मिल गया' ऐसा सोचकर अनुचित आचरण नहीं करना चाहिए। अहंकार धन को उसी प्रकार नष्ट कर देता है, जैसे बुढ़ापा सुन्दर मुख को नष्ट कर देता है। | mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न राज्यं प्राप्तमित्येव वर्तितव्यमसाम्प्रतम्।
श्रियं ह्यविनयो हन्ति जरा रूपमिवोत्तमम्॥ १२॥
अनुवाद
'अब मुझे राज्य मिल गया' ऐसा सोचकर अनुचित आचरण नहीं करना चाहिए। अहंकार धन को उसी प्रकार नष्ट कर देता है, जैसे बुढ़ापा सुन्दर मुख को नष्ट कर देता है।
One should not behave inappropriately thinking that 'Now I have attained the kingdom'. Arrogance destroys wealth in the same way as old age destroys a beautiful face.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥