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श्लोक 5.34.11  |
यस्त्वेतानि प्रमाणानि यथोक्तान्यनुपश्यति।
युक्तो धर्मार्थयोर्ज्ञाने स राज्यमधिगच्छति॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य उपर्युक्त रीति से इन बातों के प्रमाणों को जानता है और धर्म और अर्थ के ज्ञान में तल्लीन रहता है, वह राज्य को प्राप्त करता है ॥11॥ |
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| He who knows the proofs of these things in the above manner and remains engrossed in the knowledge of Dharma and Artha, attains the kingdom. ॥ 11॥ |
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