Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.34.1: धृतराष्ट्र बोले, "हे प्रिये! मैं अभी भी जाग रहा हूँ, चिंता से जल रहा हूँ। जो कुछ तुम मेरे लिए उचित समझो, वह मुझे बताओ। क्योंकि हम सब में केवल तुम ही धर्म और अर्थ के ज्ञान में निपुण हो।" | mahabharat अध्याय 5.34: धृतराष्ट्रके प्रति विदुरजीके नीतियुक्त वचन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र बोले, "हे प्रिये! मैं अभी भी जाग रहा हूँ, चिंता से जल रहा हूँ। जो कुछ तुम मेरे लिए उचित समझो, वह मुझे बताओ। क्योंकि हम सब में केवल तुम ही धर्म और अर्थ के ज्ञान में निपुण हो।"
Dhritarashtra said, "My dear, I am still awake, burning with worry. Tell me whatever you think is right for me to do. Because among us, you alone are proficient in the knowledge of Dharma and Artha."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥