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आत्मज्ञानं समारम्भस्तितिक्षा धर्मनित्यता।
यमर्थान्नापकर्षन्ति स वै पण्डित उच्यते॥ )
अनुवाद
अपने वास्तविक स्वरूप का ज्ञान, उद्योग, दुःख सहने की शक्ति और धर्म में स्थिरता - ये गुण जिसके पुरुषार्थ करने से नहीं रोकते, उसे पंडित कहते हैं।
Knowledge of one's true nature, industry, power to bear sorrow and stability in religion - the person whose qualities do not stop him from making efforts, is called a Pandit.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥