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mahabharat 5.33.93-95: जो मनुष्य विनाश को प्राप्त होने वाला है, उसके आठ पूर्व लक्षण हैं । पहले वह ब्राह्मणों से द्वेष करता है, फिर उनका विरोध करने लगता है, उनका धन हड़प लेता है, उन्हें मार डालना चाहता है, ब्राह्मणों की निन्दा करने में सुख पाता है, उनकी स्तुति सुनना नहीं चाहता, यज्ञ आदि में उनका स्मरण नहीं करता तथा कुछ मांगने पर उनमें दोष निकालने लगता है । बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि इन सब दोषों को समझकर उन्हें त्याग दे ॥93-95॥   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 93-95
 
 
श्लोक  5.33.93-95 
अष्टौ पूर्वनिमित्तानि नरस्य विनशिष्यत:।
ब्राह्मणान् प्रथमं द्वेष्टि ब्राह्मणैश्च विरुध्यते॥ ९३॥
ब्राह्मणस्वानि चादत्ते ब्राह्मणांश्च जिघांसति।
रमते निन्दया चैषां प्रशंसां नाभिनन्दति॥ ९४॥
नैनान् स्मरति कृत्येषु याचितश्चाभ्यसूयति।
एतान् दोषान् नर: प्राज्ञो बुध्येद् बुद्‍ध्वा विसर्जयेत्॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य विनाश को प्राप्त होने वाला है, उसके आठ पूर्व लक्षण हैं । पहले वह ब्राह्मणों से द्वेष करता है, फिर उनका विरोध करने लगता है, उनका धन हड़प लेता है, उन्हें मार डालना चाहता है, ब्राह्मणों की निन्दा करने में सुख पाता है, उनकी स्तुति सुनना नहीं चाहता, यज्ञ आदि में उनका स्मरण नहीं करता तथा कुछ मांगने पर उनमें दोष निकालने लगता है । बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि इन सब दोषों को समझकर उन्हें त्याग दे ॥93-95॥
 
There are eight precursors of a man who is about to go to ruin. First he hates brahmanas, then he becomes the object of their opposition, usurps their wealth, wants to kill them, finds pleasure in criticising brahmanas, does not want to hear their praises, does not remember them in yajnas and other rituals and when asked for something, starts finding faults in them. A wise man should understand all these faults and abandon them after understanding them.॥93-95॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)