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mahabharat 5.33.89: हे राजन! स्वस्थ रहना, ऋणग्रस्त न होना, परदेश में न रहना, सज्जनों का संग करना, अपने कर्म से जीविका चलाना और निर्भय होकर रहना - ये मनुष्य लोक के छः सुख हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  5.33.89 
आरोग्यमानृण्यमविप्रवास: .
सद्भिर्मनुष्यै: सह सम्प्रयोग:।
स्वप्रत्यया वृत्तिरभीतवास:
षड् जीवलोकस्य सुखानि राजन्॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! स्वस्थ रहना, ऋणग्रस्त न होना, परदेश में न रहना, सज्जनों का संग करना, अपने कर्म से जीविका चलाना और निर्भय होकर रहना - ये मनुष्य लोक के छः सुख हैं।
 
O King! Being healthy, not being indebted, not living in a foreign land, associating with good people, earning one's livelihood through one's own profession and living without fear - these are the six happinesses of the human world. 89.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)