Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.33.87-88: ये छह लोग आमतौर पर अपने पूर्व उपकारकर्ताओं का हमेशा सम्मान नहीं करते हैं - एक शिष्य अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने गुरु का सम्मान करता है, एक विवाहित पुत्र अपनी मां का सम्मान करता है, एक पुरुष अपनी यौन इच्छा पूरी होने के बाद अपनी स्त्री का सम्मान करता है, एक पुरुष अपना काम पूरा होने के बाद अपने सहायक का सम्मान करता है, एक व्यक्ति नदी के कठिन भाग को पार करने के बाद अपनी नाव का सम्मान करता है और एक बीमार व्यक्ति अपनी बीमारी से ठीक होने के बाद अपने चिकित्सक का सम्मान करता है। | mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये छह लोग आमतौर पर अपने पूर्व उपकारकर्ताओं का हमेशा सम्मान नहीं करते हैं - एक शिष्य अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने गुरु का सम्मान करता है, एक विवाहित पुत्र अपनी मां का सम्मान करता है, एक पुरुष अपनी यौन इच्छा पूरी होने के बाद अपनी स्त्री का सम्मान करता है, एक पुरुष अपना काम पूरा होने के बाद अपने सहायक का सम्मान करता है, एक व्यक्ति नदी के कठिन भाग को पार करने के बाद अपनी नाव का सम्मान करता है और एक बीमार व्यक्ति अपनी बीमारी से ठीक होने के बाद अपने चिकित्सक का सम्मान करता है।
These six usually do not always respect their previous benefactors - a disciple after the completion of his studies respects his teacher, a married son respects his mother, a man respects his woman after his sexual desire is satisfied, a man after his work is done respects his helper, a man after crossing a difficult section of the river respects his boat and a sick man after his illness is cured respects his doctor.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥