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mahabharat 5.33.73: भय को दूर करने वाले चार कर्म हैं; किन्तु यदि वे ठीक प्रकार से न किए जाएँ, तो भय उत्पन्न करते हैं। वे कर्म हैं - आदरपूर्वक अग्निहोत्र, आदरपूर्वक मौनव्रत, आदरपूर्वक स्वाध्याय और आदरपूर्वक यज्ञ करना॥ 73॥   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  5.33.73 
चत्वारि कर्माण्यभयंकराणि
भयं प्रयच्छन्त्ययथाकृतानि।
मानाग्निहोत्रमुत मानमौनं
मानेनाधीतमुत मानयज्ञ:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
भय को दूर करने वाले चार कर्म हैं; किन्तु यदि वे ठीक प्रकार से न किए जाएँ, तो भय उत्पन्न करते हैं। वे कर्म हैं - आदरपूर्वक अग्निहोत्र, आदरपूर्वक मौनव्रत, आदरपूर्वक स्वाध्याय और आदरपूर्वक यज्ञ करना॥ 73॥
 
There are four actions that remove fear; but if they are not performed properly, they give rise to fear. Those actions are- Agnihotra with respect, observing silence with respect, self-study with respect and performing Yagna with respect.॥ 73॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)