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mahabharat 5.33.54: कदापि कटुवचन न बोलें और दुष्ट पुरुषों का आदर न करें - ये दो कर्म करने वाला मनुष्य इस संसार में विशेष रूप से सम्मानित होता है ॥ 54॥   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.33.54 
द्वे कर्मणी नर: कुर्वन्नस्मिँल्लोके विरोचते।
अब्रुवन् परुषं किंचिदसतोऽनर्चयंस्तथा॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
कदापि कटुवचन न बोलें और दुष्ट पुरुषों का आदर न करें - ये दो कर्म करने वाला मनुष्य इस संसार में विशेष रूप से सम्मानित होता है ॥ 54॥
 
Do not speak harshly at all and do not respect evil men - a person who does these two deeds is especially respected in this world. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)