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mahabharat 5.33.53: जैसे साँप बिलों में रहने वाले प्राणियों को खा जाता है, वैसे ही यह पृथ्वी शत्रु का विरोध न करने वाले राजा और परदेश गमन न करने वाले ब्राह्मण, दोनों को खा जाती है ॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.33.53 
द्वाविमौ ग्रसते भूमि: सर्पो बिलशयानिव।
राजानं चाविरोद्धारं ब्राह्मणं चाप्रवासिनम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जैसे साँप बिलों में रहने वाले प्राणियों को खा जाता है, वैसे ही यह पृथ्वी शत्रु का विरोध न करने वाले राजा और परदेश गमन न करने वाले ब्राह्मण, दोनों को खा जाती है ॥ 53॥
 
Just as a snake eats up the creatures living in burrows, so this earth eats up both the king who does not oppose his enemy and the Brahmin who does not travel abroad. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)