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mahabharat 5.33.45: विष का रस पीने वाले को ही मारता है, शस्त्र से भी एक ही व्यक्ति मरता है; किन्तु गुप्त मंत्रणा का प्रकट होना न केवल राष्ट्र और प्रजा का, अपितु राजा का भी नाश कर देता है।   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.33.45 
एकं विषरसो हन्ति शस्त्रेणैकश्च वध्यते।
सराष्ट्रं सप्रजं हन्ति राजानं मन्त्रविप्लव:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
विष का रस पीने वाले को ही मारता है, शस्त्र से भी एक ही व्यक्ति मरता है; किन्तु गुप्त मंत्रणा का प्रकट होना न केवल राष्ट्र और प्रजा का, अपितु राजा का भी नाश कर देता है।
 
The juice of poison kills only one (who drinks it), a weapon kills only one person; but the revelation of a (secret) consultation destroys not only the nation and the people but also the king. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)