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mahabharat 5.33.43: वीर धनुर्धर का चलाया हुआ बाण किसी को मारे या न मारे, परन्तु बुद्धिमान् पुरुष की बुद्धि राजा के साथ-साथ सम्पूर्ण राष्ट्र का भी नाश कर सकती है ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.33.43 
एकं हन्यान्न वा हन्यादिषुर्मुक्तो धनुष्मता।
बुद्धिर्बुद्धिमतोत्सृष्टा हन्याद् राष्ट्रं सराजकम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
वीर धनुर्धर का चलाया हुआ बाण किसी को मारे या न मारे, परन्तु बुद्धिमान् पुरुष की बुद्धि राजा के साथ-साथ सम्पूर्ण राष्ट्र का भी नाश कर सकती है ॥ 43॥
 
An arrow shot by a brave archer may or may not kill anyone. But the wisdom used by a wise man can destroy the king as well as the entire nation. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)