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mahabharat 5.33.41: जो मनुष्य अच्छा भोजन करता है और अच्छे वस्त्र पहनता है, उससे बढ़कर क्रूर कौन हो सकता है, जो उसे अपने पालन-पोषण के योग्य लोगों के साथ बाँटकर नहीं खाता और अकेले ही अच्छे वस्त्र पहनता है ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.33.41 
एक: सम्पन्नमश्नाति वस्ते वासश्च शोभनम्।
योऽसंविभज्य भृत्येभ्य: को नृशंसतरस्तत:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अच्छा भोजन करता है और अच्छे वस्त्र पहनता है, उससे बढ़कर क्रूर कौन हो सकता है, जो उसे अपने पालन-पोषण के योग्य लोगों के साथ बाँटकर नहीं खाता और अकेले ही अच्छे वस्त्र पहनता है ॥ 41॥
 
Who can be more cruel than a person who eats good food and wears good clothes alone without sharing it with those who are worthy of being supported by him? ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)