Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.33.37: जो स्वयं तो दोषपूर्ण आचरण करता है, परन्तु फिर भी दूसरों के दोष बताता है और जो विवश होकर भी बिना कारण क्रोध करता है, वह महान मूर्ख है ॥37॥ | mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परं क्षिपति दोषेण वर्तमान: स्वयं तथा।
यश्च क्रुध्यत्यनीशान: स च मूढतमो नर:॥ ३७॥
अनुवाद
जो स्वयं तो दोषपूर्ण आचरण करता है, परन्तु फिर भी दूसरों के दोष बताता है और जो विवश होकर भी बिना कारण क्रोध करता है, वह महान मूर्ख है ॥37॥
He who himself behaves in a faulty manner but still points out the faults of others and who despite being helpless gets angry without any reason is a great fool. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥