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mahabharat 5.33.34: हे भरतश्रेष्ठ! जो व्यक्ति अपने कार्य को अनावश्यक रूप से टालता है, हर बात में संदेह करता है तथा शीघ्र किये जाने वाले कार्य को भी टालता है, वह मूर्ख है।   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.33.34 
संसारयति कृत्यानि सर्वत्र विचिकित्सते।
चिरं करोति क्षिप्रार्थे स मूढो भरतर्षभ॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जो व्यक्ति अपने कार्य को अनावश्यक रूप से टालता है, हर बात में संदेह करता है तथा शीघ्र किये जाने वाले कार्य को भी टालता है, वह मूर्ख है।
 
O best of the Bharatas! He who unnecessarily prolongs his work, doubts everything and delays even the work that can be done quickly, is a fool. 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)