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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.33.20 
यस्य संसारिणी प्रज्ञा धर्मार्थावनुवर्तते।
कामादर्थं वृणीते य: स वै पण्डित उच्यते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जिसकी सांसारिक बुद्धि केवल धर्म और अर्थ का अनुसरण करती है तथा जो सांसारिक सुखों को त्यागकर केवल मानवीय प्रयास को चुनता है, उसे विद्वान व्यक्ति कहा जाता है।
 
He whose worldly intellect follows only Dharma and Artha and who abandons worldly pleasures and chooses only human endeavour is called a learned person.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)