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mahabharat 5.33.18: जिसके कर्तव्य, उपदेश और विचार दूसरों को ज्ञात नहीं होते, अपितु कार्य पूर्ण होने पर ही ज्ञात होते हैं, उसे विद्वान् कहते हैं ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.33.18 
यस्य कृत्यं न जानन्ति मन्त्रं वा मन्त्रितं परे।
कृतमेवास्य जानन्ति स वै पण्डित उच्यते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जिसके कर्तव्य, उपदेश और विचार दूसरों को ज्ञात नहीं होते, अपितु कार्य पूर्ण होने पर ही ज्ञात होते हैं, उसे विद्वान् कहते हैं ॥18॥
 
He whose duties, advice and thoughts are not known to others but are known only after the work is completed, is called a scholar. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)