Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.33.15: धृतराष्ट्र बोले, "विदुर! मैं आपके धर्म से परिपूर्ण और मनुष्यों के लिए हितकारी सुन्दर वचन सुनना चाहता हूँ; क्योंकि इस ऋषियों के वंश में आप ही विद्वानों में भी आदरणीय हैं।" | mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र उवाच
श्रोतुमिच्छामि ते धर्म्यं परं नै:श्रेयसं वच:।
अस्मिन् राजर्षिवंशे हि त्वमेक: प्राज्ञसम्मत:॥ १५॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "विदुर! मैं आपके धर्म से परिपूर्ण और मनुष्यों के लिए हितकारी सुन्दर वचन सुनना चाहता हूँ; क्योंकि इस ऋषियों के वंश में आप ही विद्वानों में भी आदरणीय हैं।"
Dhritarashtra said, "Vidur! I want to hear your beautiful words which are full of righteousness and are beneficial to mankind; because in this dynasty of sages, you alone are respected even among learned men."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥