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mahabharat 5.33.123: पिता जी! उन्हें राज्य का उचित भाग देकर आप अपने पुत्रों के साथ जीवन का आनंद लें। हे प्रभु! ऐसा करने से आप देवताओं और मनुष्यों की निन्दा का विषय नहीं रहेंगे। 123।   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  5.33.123 
प्रदायैषामुचितं तात राज्यं
सुखी पुत्रै: सहितो मोदमान:।
न देवानां नापि च मानुषाणां
भविष्यसि त्वं तर्कणीयो नरेन्द्र॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
पिता जी! उन्हें राज्य का उचित भाग देकर आप अपने पुत्रों के साथ जीवन का आनंद लें। हे प्रभु! ऐसा करने से आप देवताओं और मनुष्यों की निन्दा का विषय नहीं रहेंगे। 123।
 
Father! After giving them their rightful share of the kingdom, you should enjoy life with your sons. O Lord! By doing this, you will no longer be the subject of criticism of gods and men. 123.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि प्रजागरपर्वणि विदुरनीतिवाक्ये त्रयस्त्रिंशोऽध्याय:॥ ३३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत प्रजागरपर्वमें विदुर-नीतिवाक्यविषयक तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३३॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके ६ श्लोक मिलाकर कुल १२९ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)