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mahabharat 5.33.119: जो अपनी इच्छा के अनुकूल और दूसरों की इच्छा के विरुद्ध कार्य करता है, उसके विषय में दूसरे लोग कुछ नहीं जान सकते। क्योंकि मंत्र गुप्त रहता है और इच्छित कार्य ठीक प्रकार से संपन्न होता है, इसलिए उसका किंचित मात्र भी कार्य बिगड़ नहीं सकता ॥119॥   |   mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  5.33.119 
चिकीर्षितं विप्रकृतं च यस्य
नान्ये जना: कर्म जानन्ति किंचित्।
मन्त्रे गुप्ते सम्यगनुष्ठिते च
नाल्पोऽप्यस्य च्यवते कश्चिदर्थ:॥ ११९॥
 
 
अनुवाद
जो अपनी इच्छा के अनुकूल और दूसरों की इच्छा के विरुद्ध कार्य करता है, उसके विषय में दूसरे लोग कुछ नहीं जान सकते। क्योंकि मंत्र गुप्त रहता है और इच्छित कार्य ठीक प्रकार से संपन्न होता है, इसलिए उसका किंचित मात्र भी कार्य बिगड़ नहीं सकता ॥119॥
 
Others cannot know anything about the work of one who is in accordance with his own wishes and against the wishes of others. Because the mantra remains secret and the desired task is accomplished correctly, not even a little of his work can be spoilt. ॥ 119॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)