Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.33.113: जो अपने सुख से प्रसन्न नहीं होता, दूसरों के दुःख से प्रसन्न नहीं होता और दान देने के बाद भी पश्चाताप नहीं करता, वह सज्जनों में पुण्यात्मा कहा गया है ॥113॥ | mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न स्वे सुखे वै कुरुते प्रहर्षं
नान्यस्य दु:खे भवति प्रहृष्ट:।
दत्त्वा न पश्चात् कुरुतेऽनुतापं
स कथ्यते सत्पुरुषार्यशील:॥ ११३॥
अनुवाद
जो अपने सुख से प्रसन्न नहीं होता, दूसरों के दुःख से प्रसन्न नहीं होता और दान देने के बाद भी पश्चाताप नहीं करता, वह सज्जनों में पुण्यात्मा कहा गया है ॥113॥
He who is not pleased with his own happiness, does not rejoice at the sorrow of others, and does not repent after giving charity is called a virtuous man among gentlemen. ॥ 113॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥