Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.33.106: जो दुर्बल का अपमान नहीं करता, सदा सावधान रहता है और शत्रु के साथ बुद्धिमानी से व्यवहार करता है, बलवान से युद्ध करना पसन्द नहीं करता और समय आने पर वीरता दिखाता है, वह धैर्यवान है ॥106॥ | mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुदुर्बलं नावजानाति कंचिद्
युक्तो रिपुं सेवते बुद्धिपूर्वम्।
न विग्रहं रोचयते बलस्थै:
काले च यो विक्रमते स धीर:॥ १०६॥
अनुवाद
जो दुर्बल का अपमान नहीं करता, सदा सावधान रहता है और शत्रु के साथ बुद्धिमानी से व्यवहार करता है, बलवान से युद्ध करना पसन्द नहीं करता और समय आने पर वीरता दिखाता है, वह धैर्यवान है ॥106॥
He who does not insult the weak, is always cautious and deals with the enemy wisely, does not like to fight with the strong and shows valour when the time comes, is a patient person. ॥106॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥