Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.33.105: जो मनुष्यों में विश्वास उत्पन्न करना जानता है, जो केवल उन्हीं को दण्ड देता है जिनका अपराध सिद्ध हो चुका है, जो दण्ड की मात्रा तथा क्षमा का उपयोग जानता है, उस राजा का सारा धन उसके काम आता है ॥105॥ | mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जानाति विश्वासयितुं मनुष्यान्
विज्ञातदोषेषु दधाति दण्डम्।
जानाति मात्रां च तथा क्षमां च
तं तादृशं श्रीर्जुषते समग्रा॥ १०५॥
अनुवाद
जो मनुष्यों में विश्वास उत्पन्न करना जानता है, जो केवल उन्हीं को दण्ड देता है जिनका अपराध सिद्ध हो चुका है, जो दण्ड की मात्रा तथा क्षमा का उपयोग जानता है, उस राजा का सारा धन उसके काम आता है ॥105॥
He who knows how to instill confidence in men, who punishes only those whose guilt has been proven, who knows the degree to which punishment should be given and the use of forgiveness, all the wealth of that king comes to his service. ॥105॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥