Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.33.101-102: महाराज धृतराष्ट्र! जो लोग धर्म के तत्त्व को नहीं जानते, वे दस प्रकार के हैं। उनके नाम सुनो। मतवाले, प्रमादी, उन्मत्त, थके हुए, क्रोधी, भूखे, उतावले, लोभी, भयभीत और कामी - ये दस हैं। अतः विद्वान पुरुष को इन सब लोगों में आसक्त नहीं होना चाहिए। ॥101-102॥ | mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दश धर्मं न जानन्ति धृतराष्ट्र निबोध तान्।
मत्त: प्रमत्त उन्मत्त: श्रान्त: क्रुद्धो बुभुक्षित:॥ १०१॥
त्वरमाणश्च लुब्धश्च भीत: कामी च ते दश।
तस्मादेतेषु सर्वेषु न प्रसज्जेत पण्डित:॥ १०२॥
अनुवाद
महाराज धृतराष्ट्र! जो लोग धर्म के तत्त्व को नहीं जानते, वे दस प्रकार के हैं। उनके नाम सुनो। मतवाले, प्रमादी, उन्मत्त, थके हुए, क्रोधी, भूखे, उतावले, लोभी, भयभीत और कामी - ये दस हैं। अतः विद्वान पुरुष को इन सब लोगों में आसक्त नहीं होना चाहिए। ॥101-102॥
Maharaja Dhritarashtra! There are ten types of people who do not know the essence of religion, listen to their names. Drunk, careless, insane, tired, angry, hungry, hasty, greedy, fearful and lustful – these are the ten. Therefore, a learned person should not get attached to all these people. ॥101-102॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥