Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.33.100: जो विद्वान् पुरुष इस शरीररूपी घर को, जिसके नौ द्वार (आँख, कान आदि) हैं, जिसके (सत्व, रज और तम रूपी) तीन स्तंभ हैं, जिसके (इन्द्रिय रूपी) पाँच साक्षी हैं, जो आत्मा का निवास है, तत्त्वों से जानता है, वह बड़ा ज्ञानी पुरुष है ॥100॥ | mahabharat अध्याय 5.33: धृतराष्ट्र-विदुर-संवाद । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नवद्वारमिदं वेश्म त्रिस्थूणं पञ्चसाक्षिकम्।
क्षेत्रज्ञाधिष्ठितं विद्वान् यो वेद स पर: कवि:॥ १००॥
अनुवाद
जो विद्वान् पुरुष इस शरीररूपी घर को, जिसके नौ द्वार (आँख, कान आदि) हैं, जिसके (सत्व, रज और तम रूपी) तीन स्तंभ हैं, जिसके (इन्द्रिय रूपी) पाँच साक्षी हैं, जो आत्मा का निवास है, तत्त्वों से जानता है, वह बड़ा ज्ञानी पुरुष है ॥100॥
The learned man who knows from the elements this body-like house, which has nine doors [eyes, ears etc.], has three pillars (in the form of sattva, raj and tama), five witnesses (in the form of sense organs), the abode of the soul, is a very knowledgeable person. 100॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥