Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.32.d7: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार कुन्तीपुत्र धनंजय ने संजय को जाने की आज्ञा देकर अर्थ और धर्म से परिपूर्ण बात कही, जिससे उसके स्वजनों को आनन्द हुआ और धृतराष्ट्र के पुत्र भयभीत हो गये। | mahabharat अध्याय 5.32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार कुन्तीपुत्र धनंजय ने संजय को जाने की आज्ञा देकर अर्थ और धर्म से परिपूर्ण बात कही, जिससे उसके स्वजनों को आनन्द हुआ और धृतराष्ट्र के पुत्र भयभीत हो गये।
Vaishampayanji says – Janamejaya! In this way, Kunti's son Dhananjaya, after allowing Sanjay to go, said something full of meaning and religion, which gave joy to his relatives and frightened the sons of Dhritarashtra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥