Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.32.6: धृतराष्ट्र बोले- द्वारपाल! संजय का स्वागत है। उससे कहो कि मैं स्वस्थ हूँ, अतः मैं अभी उससे मिलने के लिए तैयार हूँ। उसे भीतर ले आओ। मुझे उससे मिलने में कभी कोई परेशानी नहीं होती। फिर वह द्वार के पास क्यों खड़ा है?॥6॥ | mahabharat अध्याय 5.32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र उवाच
आचक्ष्व मां कुशलिनं कल्पमस्मै
प्रवेश्यतां स्वागतं संजयाय।
न चाहमेतस्य भवाम्यकल्प:
स मे कस्माद् द्वारि तिष्ठेच्च सक्त:॥ ६॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले- द्वारपाल! संजय का स्वागत है। उससे कहो कि मैं स्वस्थ हूँ, अतः मैं अभी उससे मिलने के लिए तैयार हूँ। उसे भीतर ले आओ। मुझे उससे मिलने में कभी कोई परेशानी नहीं होती। फिर वह द्वार के पास क्यों खड़ा है?॥6॥
Dhritarashtra said— Gatekeeper! Sanjaya is welcome. Tell him that I am well, so I am ready to meet him right now. Bring him inside. I never have any problem in meeting him. Then why is he standing close to the door?॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥