Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.32.4: द्वारपाल! यदि महाराज जाग रहे हों, तो उन्हें मेरा प्रणाम कहना। उनकी सूचना पाकर मैं भीतर जाऊँगा। मुझे उनसे एक आवश्यक निवेदन करना है।' यह सुनकर द्वारपाल महाराज के पास गया और इस प्रकार बोला॥4॥ | mahabharat अध्याय 5.32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जागर्ति चेदभिवदेस्त्वं हि द्वा:स्थ
प्रविशेयं विदितो भूमिपस्य।
निवेद्यमत्रात्ययिकं हि मेऽस्ति
द्वा:स्थोऽथ श्रुत्वा नृपतिं जगाम॥ ४॥
अनुवाद
द्वारपाल! यदि महाराज जाग रहे हों, तो उन्हें मेरा प्रणाम कहना। उनकी सूचना पाकर मैं भीतर जाऊँगा। मुझे उनसे एक आवश्यक निवेदन करना है।' यह सुनकर द्वारपाल महाराज के पास गया और इस प्रकार बोला॥4॥
Gatekeeper! If Maharaj is awake, then convey my regards to him. After getting his information, I will enter inside. I have to make an important request to him.' Hearing this, the gatekeeper went to Maharaj and spoke thus.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥