Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.32.30: नरेन्द्र! तुमने ऐसे लोगों (शकुनि-कर्ण आदि) को इकट्ठा किया है जो विश्वासयोग्य नहीं हैं और तुमने विश्वासयोग्य पुरुषों (पाण्डवों) को दण्डित किया है। अतः हे कुरुकुलपुत्र! अपनी इस (मानसिक) दुर्बलता के कारण तुम अनन्त और समृद्ध पृथ्वी की रक्षा कभी नहीं कर सकोगे।   |   mahabharat अध्याय 5.32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.32.30 
अनाप्तानां संग्रहात् त्वं नरेन्द्र
तथाऽऽप्तानां निग्रहाच्चैव राजन्।
भूमिं स्फीतां दुर्बलत्वादनन्ता-
मशक्तस्त्वं रक्षितुं कौरवेय॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
नरेन्द्र! तुमने ऐसे लोगों (शकुनि-कर्ण आदि) को इकट्ठा किया है जो विश्वासयोग्य नहीं हैं और तुमने विश्वासयोग्य पुरुषों (पाण्डवों) को दण्डित किया है। अतः हे कुरुकुलपुत्र! अपनी इस (मानसिक) दुर्बलता के कारण तुम अनन्त और समृद्ध पृथ्वी की रक्षा कभी नहीं कर सकोगे।
 
Narendra! You have gathered such people (Shakuni-Karna etc.) who are not trustworthy and you have punished the trustworthy men (Pandavas). Therefore, O son of the Kurukula! Due to this (mental) weakness of yours, you will never be able to protect the infinite and prosperous earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)