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mahabharat 5.32.25: आँख, कान, नाक, त्वचा और जीभ - ये पाँचों इन्द्रियाँ समस्त प्राणियों के रूप आदि विषयों के ज्ञान के स्थान (कारण) हैं। भूख मिट जाने पर वह सदैव प्रसन्न रहती है। अतः मनुष्य को दुःख-दर्द से मुक्त होने और तृष्णा से मुक्ति पाने के लिए उन इन्द्रियों को वश में करना चाहिए। 25॥   |   mahabharat अध्याय 5.32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.32.25 
चक्षु:श्रोत्रे नासिका त्वक् च जिह्वा
ज्ञानस्यैतान्यायतनानि जन्तो:।
तानि प्रीतान्येव तृष्णाक्षयान्ते
तान्यव्यथो दु:खहीन: प्रणुद्यात्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
आँख, कान, नाक, त्वचा और जीभ - ये पाँचों इन्द्रियाँ समस्त प्राणियों के रूप आदि विषयों के ज्ञान के स्थान (कारण) हैं। भूख मिट जाने पर वह सदैव प्रसन्न रहती है। अतः मनुष्य को दुःख-दर्द से मुक्त होने और तृष्णा से मुक्ति पाने के लिए उन इन्द्रियों को वश में करना चाहिए। 25॥
 
Eye, ear, nose, skin and tongue – these five sense organs are the places (reasons) for knowledge of subjects like the form of all living beings. She always remains happy after her hunger is over. Therefore, man should control those senses in order to be free from pain and sorrow and get rid of his thirst. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)