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mahabharat 5.32.2: हस्तिनापुर पहुँचकर वे शीघ्रतापूर्वक राजमहल में प्रविष्ट हुए और भीतरी कक्ष के पास जाकर द्वारपाल से बोले -॥2॥   |   mahabharat अध्याय 5.32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.32.2 
सम्प्राप्य हास्तिनपुरं शीघ्रमेव प्रविश्य च।
अन्त:पुरं समास्थाय द्वा:स्थं वचनमब्रवीत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हस्तिनापुर पहुँचकर वे शीघ्रतापूर्वक राजमहल में प्रविष्ट हुए और भीतरी कक्ष के पास जाकर द्वारपाल से बोले -॥2॥
 
On reaching Hastinapur he quickly entered the royal palace and going near the inner chamber he said to the gatekeeper -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)