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mahabharat 5.32.13: महाराज! जैसे डोरी से बँधी हुई कठपुतली दूसरों की प्रेरणा पाकर ही नाचती है, वैसे ही मनुष्य भी ईश्वर की प्रेरणा पाकर ही कर्म करता है। पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर का कष्ट देखकर मुझे यह विश्वास हो गया है कि ईश्वरीय विधान मनुष्य के प्रयत्नों से भी अधिक शक्तिशाली है।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 32: अर्जुनद्वारा कौरवोंके लिये संदेश देना, संजयका हस्तिनापुर जा धृतराष्ट्रसे मिलकर उन्हें युधिष्ठिरका कुशल-समाचार कहकर धृतराष्ट्रके कार्यकी निन्दा करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.32.13 
परप्रयुक्त: पुरुषो विचेष्टते
सूत्रप्रोता दारुमयीव योषा।
इमं दृष्ट्वा नियमं पाण्डवस्य
मन्ये परं कर्म दैवं मनुष्यात्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जैसे डोरी से बँधी हुई कठपुतली दूसरों की प्रेरणा पाकर ही नाचती है, वैसे ही मनुष्य भी ईश्वर की प्रेरणा पाकर ही कर्म करता है। पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर का कष्ट देखकर मुझे यह विश्वास हो गया है कि ईश्वरीय विधान मनुष्य के प्रयत्नों से भी अधिक शक्तिशाली है।॥13॥
 
Maharaj! Just as a puppet tied to a string dances only after being inspired by others, similarly man works only after being inspired by God. Seeing the suffering of Yudhishthira, the son of Pandava, I have started believing that divine law is more powerful than the efforts of man.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)