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mahabharat 5.31.3: यदि दुर्योधन या धृतराष्ट्र मेरे बल और सेना के विषय में पूछें, तो तुम उन्हें सब कुछ ठीक-ठीक बता देना, जिससे वे प्रसन्न होकर आपस में परामर्श करके उचित रीति से अपना कर्तव्य निश्चित कर सकें॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.31: युधिष्ठिरका मुख्य-मुख्य कुरुवंशियोंके प्रति संदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 31: युधिष्ठिरका मुख्य-मुख्य कुरुवंशियोंके प्रति संदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.31.3 
बलं जिज्ञासमानस्य आचक्षीथा यथातथम्।
अथ मन्त्रं मन्त्रयित्वा याथातथ्येन हृष्टवत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यदि दुर्योधन या धृतराष्ट्र मेरे बल और सेना के विषय में पूछें, तो तुम उन्हें सब कुछ ठीक-ठीक बता देना, जिससे वे प्रसन्न होकर आपस में परामर्श करके उचित रीति से अपना कर्तव्य निश्चित कर सकें॥3॥
 
If Duryodhan or Dhritarashtra ask about my strength and army, you should tell them everything accurately. So that they can be happy and after consulting each other, decide their duty in the right way.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)