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mahabharat 5.31.18: हे राजन! इस प्रकार हम दोनों में शान्ति और प्रेम बना रहेगा। हम शान्ति चाहते हैं; चाहे आप हमें राज्य का एक अंश ही क्यों न दे दें॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.31: युधिष्ठिरका मुख्य-मुख्य कुरुवंशियोंके प्रति संदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 31: युधिष्ठिरका मुख्य-मुख्य कुरुवंशियोंके प्रति संदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.31.18 
शान्तिरेवं भवेद् राजन् प्रीतिश्चैव परस्परम्।
राज्यैकदेशमपि न: प्रयच्छ शममिच्छताम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इस प्रकार हम दोनों में शान्ति और प्रेम बना रहेगा। हम शान्ति चाहते हैं; चाहे आप हमें राज्य का एक अंश ही क्यों न दे दें॥18॥
 
‘O King! In this way peace and love can remain between us. We want peace; even if you give us only a part of the kingdom.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)