Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.30.6: संजय! तुम हमारे परम प्रिय हो। ऐसा प्रतीत होता है कि कोई अन्य विदुरजी यहाँ (संदेशवाहक बनकर) आये हैं। तुम हमसे पहले भी कई बार मिल चुके हो और धनंजय के प्राणों के समान प्रिय मित्र हो। | mahabharat अध्याय 5.30: संजयकी विदाई तथा युधिष्ठिरका संदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वमेव न: प्रियतमोऽसि दूत
इहागच्छेद् विदुरो वा द्वितीय:।
अभीक्ष्णदृष्टोऽसि पुरा हि नस्त्वं
धनंजयस्यात्मसम: सखासि॥ ६॥
अनुवाद
संजय! तुम हमारे परम प्रिय हो। ऐसा प्रतीत होता है कि कोई अन्य विदुरजी यहाँ (संदेशवाहक बनकर) आये हैं। तुम हमसे पहले भी कई बार मिल चुके हो और धनंजय के प्राणों के समान प्रिय मित्र हो।
Sanjay! You are our dearest. It seems that some other Vidurji has come here (as a messenger). You have met us many times before and you are a dear friend to Dhananjay like his own soul.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥