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mahabharat 5.30.47: यद्यपि इस पृथ्वी पर दुर्योधन के समान कोई योद्धा नहीं है, तथापि धर्म सनातन है और शत्रुओं का नाश करने के लिए वही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है ॥ 47॥   |   mahabharat अध्याय 5.30: संजयकी विदाई तथा युधिष्ठिरका संदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.30.47 
न हीदृशा: सन्त्यपरे पृथिव्यां
ये योधका धार्तराष्ट्रेण लब्धा:।
धर्मस्तु नित्यो मम धर्म एव
महाबल: शत्रुनिबर्हणाय॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि इस पृथ्वी पर दुर्योधन के समान कोई योद्धा नहीं है, तथापि धर्म सनातन है और शत्रुओं का नाश करने के लिए वही मेरी सबसे बड़ी शक्ति है ॥ 47॥
 
Though there are no warriors like the ones gathered by Duryodhana on this earth, yet Dharma is eternal and it is the greatest force I have to destroy my enemies. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)