Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.30.42: और उन्हें भी मेरा सन्देश सुनाओ और उन्हें आश्वस्त करो। तुम्हें जो दुःख भोगना है, जो दरिद्र जीवन जीना है, उससे मत डरो। यह निश्चय ही पूर्वजन्मों के पापों का फल है। कुछ ही दिनों में मैं अपने शत्रुओं को बन्दी बना लूँगा और अपने हितैषी मित्रों पर कृपा करके तुम्हें अन्न-वस्त्र प्रदान करूँगा॥ 42॥ | mahabharat अध्याय 5.30: संजयकी विदाई तथा युधिष्ठिरका संदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मा भैष्ट दु:खेन कुजीवितेन
नूनं कृतं परलोकेषु पापम्।
निगृह्य शत्रून् सुहृदोऽनुगृह्य
वासोभिरन्नेन च वो भरिष्ये॥ ४२॥
अनुवाद
और उन्हें भी मेरा सन्देश सुनाओ और उन्हें आश्वस्त करो। तुम्हें जो दुःख भोगना है, जो दरिद्र जीवन जीना है, उससे मत डरो। यह निश्चय ही पूर्वजन्मों के पापों का फल है। कुछ ही दिनों में मैं अपने शत्रुओं को बन्दी बना लूँगा और अपने हितैषी मित्रों पर कृपा करके तुम्हें अन्न-वस्त्र प्रदान करूँगा॥ 42॥
Also, assure them and convey my message to them. Do not be afraid of the misery you have to go through or the wretched life you have to live. This is certainly the result of the sins committed in previous lives. In a few days, I will imprison my enemies and, being gracious to my well-wishing friends, will provide you with food and clothing.॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥