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mahabharat 5.30.33: संजय! तुम वृद्ध स्त्रियों से इस प्रकार कहो - ‘माताओं! तुम्हारे पुत्र तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार करते हैं न? क्या वे क्रूर हो गए हैं? क्या उन सबके पुत्र दीर्घायु हो गए हैं?’ ऐसा कहकर उनसे कहो कि तुम्हारे पुत्र अजातशत्रु युधिष्ठिर अपने पुत्रों सहित सुरक्षित हैं॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 5.30: संजयकी विदाई तथा युधिष्ठिरका संदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 30: संजयकी विदाई तथा युधिष्ठिरका संदेश  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.30.33 
कच्चित् पुत्रा जीवपुत्रा: सुसम्यग्
वर्तन्ते वो वृत्तिमनृशंसरूपा:।
इति स्मोक्त्वा संजय ब्रूहि पश्चा-
दजातशत्रु: कुशली सपुत्र:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
संजय! तुम वृद्ध स्त्रियों से इस प्रकार कहो - ‘माताओं! तुम्हारे पुत्र तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार करते हैं न? क्या वे क्रूर हो गए हैं? क्या उन सबके पुत्र दीर्घायु हो गए हैं?’ ऐसा कहकर उनसे कहो कि तुम्हारे पुत्र अजातशत्रु युधिष्ठिर अपने पुत्रों सहित सुरक्षित हैं॥ 33॥
 
Sanjaya! Tell the elderly women like this - 'Mothers! Your sons behave well with you, don't they? Have they become cruel? Have all of them got long-lived sons?' After saying this, tell them that your son Ajatashatru Yudhishthira is safe along with his sons.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)