Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.30.31: दूरदर्शी और ज्ञानी विदुरजी हमारे प्रेमी, गुरु, संरक्षक, पिता, माता और मित्र हैं। वे हमारे मंत्री भी हैं। संजय! कृपया मेरी ओर से उनका कुशलक्षेम पूछिए। | mahabharat अध्याय 5.30: संजयकी विदाई तथा युधिष्ठिरका संदेश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स एव भक्त: स गुरु: स भर्ता
स वै पिता स च माता सुहृच्च।
अगाधबुद्धिर्विदुरो दीर्घदर्शी
स नो मन्त्री कुशलं तं स्म पृच्छे:॥ ३१॥
अनुवाद
दूरदर्शी और ज्ञानी विदुरजी हमारे प्रेमी, गुरु, संरक्षक, पिता, माता और मित्र हैं। वे हमारे मंत्री भी हैं। संजय! कृपया मेरी ओर से उनका कुशलक्षेम पूछिए।
Viduraji, the farsighted and wise man, is our lover, teacher, guardian, father, mother and friend. He is also our minister. Sanjaya! Please ask about his well-being on my behalf.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥