श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 30: संजयकी विदाई तथा युधिष्ठिरका संदेश  »  श्लोक 11-d2h
 
 
श्लोक  5.30.11-d2h 
ये जीवन्ति व्यवहारेण राष्ट्रे
पशूंश्च ये पालयन्तो वसन्ति॥ ११॥
(कृषीवला बिभ्रति ये च लोकं
तेषां सर्वेषां कुशलं स्म पृच्छे:।)
 
 
अनुवाद
उन समस्त वैश्यों का कुशलक्षेम पूछिए, जो कौरव राज्य में व्यापार द्वारा जीविका चलाते हैं, पशुपालन से जीविका चलाते हैं और कृषि द्वारा सबका भरण-पोषण करते हैं। ॥11॥
 
Inquire about the well-being of all those Vaishyas, who earn their living through business in the Kaurava kingdom, who live by rearing animals and who support everyone through farming. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)